वैकल्पिक विषय · भाषाओं का साहित्य
UPSC बांग्ला साहित्य वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026
पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 130–133) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।
Read in Englishमुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे
बांग्ला साहित्य — प्रश्न पत्र I
भाषा और साहित्य का इतिहास (उत्तर बांगला में लिखने होंगे)
खंड ‘क’
मोर जीवन स्मरण
लक्ष्मीनाथ बेजबरूआ द्वारा कृपाबार बराबरूआ
लक्ष्मीनाथ बेजबरूआ द्वारा काकतर
तोपोला
प्रतिमा
चंद्र कुमार अगरवाला गांवबूढ़ा
पद्मनाथ गोहेन बरूआ द्वारा मनोमति
रजनीकांत बोरदोलोई द्वारा पुरणी असमिया साहित्य
बानीकांत काकती द्वारा आरीआंग लिगिरी
ज्योति प्रसाद अगरवाला द्वारा जीबनार बातत
बीना बरूआ (बिरिंचि कुमार बरूवा) द्वारा मृत्युंजय
बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य द्वारा सम्राट
नवकांत बरूआ द्वारा बांगला भाषा के इतिहास के विषय
आद्य भारोपीय से बांगला तक का कालानुक्रमिक विकास (शाखाओं सहित वंशवृक्ष एवं अनुमानित तिथियां)
बांगला इतिहास के विभिन्न चरण (प्राचीन, मध्य एवं नवीन) एवं उनकी भाषा विज्ञान-संबंधी विशिष्टताएं।
बांगला की नीतियां एवं उनके विभेदक लक्षण।
बांगला शब्दावली के तत्व
बांगला गद्य-साहित्य के रूप-साधु एवं पतित
अपिनिहित (विप्रकर्ष), अभिश्रुति (उम्लाउट), मूर्धन्यीभवन (प्रतिवेष्टन), नासिक्यीभवन (अनुनासिकृत) समीभवन (समीकरण), सादृश्य (एनेलोजी), स्वरागम (स्वर सन्निवेश) आदि स्वरागम मध्य स्वरागम अथवा स्वर भक्ति, अत्य स्वरागम, स्वर संगति (वावल हार्मनी), Y - श्रुति एवं W - श्रुति
मानकीकरण की समस्याएं तथा वर्ण माला और वर्तनी तथा लिप्यंतरण और रोमनीकरण का सुधार।
आधुनिक बांगला का स्वनिमविज्ञान, रूपविज्ञान और वाक्य विन्यास। (आधुनिक बांगला की ध्वनियों, समुच्चयबोधक, शब्द रचनाएं, समास, मूल वाक्य अभिरचना।
खंड 'ख'
बांगला साहित्य के इतिहास के विषय:
बांगला साहित्य का काल विभाजन: प्राचीन बांगला एवं मध्यकालीन बांगला।
आधुनिक तथा पूर्व-आधुनिक-पूर्व बांगला साहित्य के बीच अंतर से संबंधित विषय।
बांगला साहित्य में आधुनिकता के अभ्युदय के आधार तथा कारण।
विभिन्न मध्यकालीन बांगला रूपों का विकास: मंगल काव्य, वैष्णव गीतिकाव्य, रूपांतरित आख्यान (रामायण, महाभारत, भागवत) एवं धार्मिक जीवनचरित।
मध्यकालीन बांगला साहित्य में धर्म निरपेक्षता का स्वरूप।
उन्नीसवीं शताब्दी के बांगला काव्य में आख्यानक एवं गीतिकाव्यात्मक प्रवृत्तियां।
गद्य का विकास।
बांगला नाटक साहित्य (उन्नीसवीं शताब्दी, टैगोर, 1944 के उपरांत के बांगला नाटक)।
टैगोर एवं टैगोरोत्तर।
कथा साहित्य, प्रमुख लेखक : (बंकिमचन्द्र, टैगोर, शरतचन्द्र, विभूतिभूषण, ताराशंकर, माणिक)।
नारी एवं बांगला साहित्य: सर्जक एवं सृजित।
मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे
बांग्ला साहित्य — प्रश्न पत्र II
विस्तृत अध्ययन के लिए निर्धारित पुस्तकें (उत्तर बांगला में लिखने होंगे)
खंड 'क'
वैष्णव पदावली: (कलकत्ता विश्वविद्यालय) विद्यापति, चंडीदास, ज्ञानदास, गोविन्ददास एवं बलरामदास की कविताएं.
चंडीमंगल: मुकुन्द द्वारा कालकेतु वृतान्त, (साहित्य अकादमी).
चैतन्य चरितामृत: मध्य लीला, कृष्णदास कविराज रचित (साहित्य अकादमी)
मेघनादवध काव्य: मधुसूदन दत्ता रचित।
कपालकुण्डला: बंकिमचंद्र चटर्जी रचित।
समय एवं बंगदेशेर कृषक: बंकिमचंद्र चटर्जी रचित।
सोनार तारी: रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित।
छिन्नपत्रावली: रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित।
खंड 'ख'
रक्तकरबी: रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित।
नबजातक: रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित।
गृहदाह: शरतचन्द्र चटर्जी रचित।
प्रबंध संग्रह: भाग-1, प्रमथ चौधरी रचित।
अरण्यक: विभूतिभूषण बनर्जी रचित।
कहानियां: माणिक बंद्योपाधयाय रचित : अताशी मामी, प्रागैतिहासिक, होलुद-पोरा, सरीसृप, हारानेर, नटजमाई, छोटो-बोकुलपुरेर जात्री, कुष्ठरोगीर बौऊ, जाके घुश दिते होय।
श्रेष्ठ कविता: जीवनाचंद दास रचित।
जानौरी: सतीनाथ भादुड़ी रचित।
इंद्रजीत: बादल सरकार रचित।
पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 130–133 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।
भाषाओं का साहित्य के अन्य वैकल्पिक विषय
FAQ
बांग्ला साहित्य: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर
UPSC बांग्ला साहित्य वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?
दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।
UPSC बांग्ला साहित्य वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?
UPSC इसे इस तरह बाँटता है: पेपर 1 — खंड ‘क’; खंड 'ख'; पेपर 2 — खंड 'क'; खंड 'ख'। दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के शब्दों में है।
बांग्ला साहित्य का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?
सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 130–133।