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वैकल्पिक विषय

वैकल्पिक विषय · विज्ञान, कृषि एवं चिकित्सा विज्ञान

UPSC चिकित्सा विज्ञान वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026

पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 227–233) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।

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सामान्य अध्ययन में कहाँ काम आता है

यह वैकल्पिक विषय GS II में स्वास्थ्य नीति से; GS III में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ता है।

GS 2 पाठ्यक्रम →GS 3 पाठ्यक्रम →

यह हमारी टिप्पणी है, UPSC की नहीं।

मुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे

चिकित्सा विज्ञान — प्रश्न पत्र I

1.

मानव शरीर:

उपरि एवं अधोशाखाओं, स्कंधसंधियों, कूल्हे एवं कलाई में रक्त एवं तंत्रिका संभरण समेत अनुप्रयुक्त शरीर।

सकलशरीर सक्तसंभरण एवं जिह्वा का लिंफीय अपवाह, थायरॉइड, स्तन ग्रंथि, जठर यकृत, प्रोस्टेट, जननग्रंथि एवं गर्भाशय।

डायाफ्राम, पेरीनियग एवं चंक्षणप्रदेश का अनुप्रयुक्त शरीर। वृक्क, मूत्राशय, गर्भाश्य नलिकाओं, शुक्रवाहिकाओं का रोगलक्षण शरीर

भ्रूण विज्ञान: अपरा एवं अपरा रोध, ह्दय, आंत्र वृक्क, गर्भाशय डिम्बग्रंथि वृषण का विकास एवं उनकी सामान्य जन्मजात असामान्यताएं।

केन्द्रीय एवं परिसरीय स्वसंचालित तंत्रिका तंत्र:

मस्तिक के निलयों, प्रमस्तिकमेरू द्रव के परि भ्रमण का सकल एवं रोगलक्षण शरीर, तंत्रिका मार्ग त्वचीय संवेदन, श्रवण एवं दृष्टि विक्षति, कपाल तंत्रिकाएं, वितरण एवं रोगलाक्षिणक महत्व, स्वसंचालित तंत्रिका तंत्र के अवयव।

2.

मानव शरीर क्रिया विज्ञान:

अवेग का चालन एवं संचरण, संकुचन की क्रियाविधि, पंत्रिका-पेशीय संचरण, प्रतिवर्त, संतुलन नियंत्रण, संस्थिति एवं पेशी-तान, अवरोही मार्ग, अनुमस्तिष्क के कार्य, आधारी गंडिकाएं, निद्रा एवं चेतना का क्रियाविज्ञान।

अंत: स्त्रावी तंत्र : हार्मोंन क्रिया की क्रियाविधि, रचना स्त्रवण, परिवहन, उपापचय, पैंक्रियाज एवं पीयूष ग्रंथि के कार्य एवं स्त्रवण नियमन।

जनन तंत्र का क्रिया विज्ञान: आर्तवचक स्तन्यस्त्रवण, सगर्भता।

रक्त: विकास, नियमन एवं रक्तकोशिकाओं का परि णाम।

हृदवाहिका, हृदनिस्पादन, रक्तदाब, ह्द्वाहिकी कार्य का नियमन।

3.

जैव रसायन:

अंगकार्य परीक्षण - यकृत, वृक्क, थायरॉइड।

प्रोटीन संश्लेषण।

विटामिन एवं खनिज।

निर्बन्धन वि खंड दैर्ध्य बहुरूपता (RFLP)

पॉलीमेरेज श्रृंखला प्रतिक्रिया (PCR)

रेडियो- इम्यूनोऐसे (RIC)

4.

विकृति विज्ञान:

थोथ एवं विरोहण, वृद्धि विक्षोभ एवं कैन्सर, रहयूमैटिक एवं इस्कीमिक हृदय रोग एवं डायबिटीज मेलिटस का विकृतिजनन एवं ऊतकविकृति विज्ञान। सुदम्य, दुर्दम, प्राथमिक एवं विक्षेपी दुर्दमता में वि भेदन, श्रवसनीजन्य कार्सिनोमा, मुख कैंसर, ग्रीवा कैंसर, ल्यूकीमिया, यकृत सिरोसिस स्तवकवृशोथा, यक्षमा, तीव्र अस्थिमज्जाशोथ का हेतु, विकृतिजनन एवं ऊतक विकृति विज्ञान।

5.

सूक्ष्मजैविकी:

देहद्रवी एवं कोशिका माध्यमित रोगक्षमता

निम्नलिखित रोग कारक एवं उनका प्रयोगशाला निदान: - मेंनिगोकॉक्वस, सालमोनेला

- शिगेला, हर्पीज, डेंगू, पोलियो

- H IV/AIDS, मलेरिया, ई-हिस्टोलिटिका, गियार्डिया।

- कैंडिड, क्रिप्टोकॉवक्स, ऐस्पर्जिलस

6.

भेषजगुण विज्ञान:

निम्नलिखित औषधों के कार्य की क्रियाविधि एवं पार्श्वप्रभाव: - ऐन्टिपायरेटिक्स, एवं एनाल्जेसिक्स, ऐन्टिबायोटिक्स, ऐन्टिमलेरिया, ऐन्टिकालाजार, ऐन्टिबायोटिक्स

- ऐन्टिहायपरटेंसिव, ऐन्टिडाइयूरेटिक्स, सामान्य एवं ह्द वासोडिलेटर्स ऐन्टिवाइरल, ऐन्टिपैरासिटिक, ऐन्टीफंगल, इम्यूनोसप्रेशैंट्स

- ऐन्टिकेंसर

7.

न्याय संबंधी औषध एवं वि षविज्ञान:

क्षति एवं घावों की न्यायालयी परीक्षा, रक्त एवं शुक्र धब्बों की परीक्षा, वि षाक्तता, शामक अतिमात्रा, फाँसी, डूबना, जलना, DNN एवं फिंगरप्रिंट अध्ययन।

मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे

चिकित्सा विज्ञान — प्रश्न पत्र II

1.

सामान्य कायचिकित्सा:

टेटनस, रैबीज, AIDS डेंग्यू, काला–आजार, जापानी एन्सेफेलाइटिस का हेतु, रोग लक्षण विशेषताएं, निदान एवं प्रबंधन के सिद्धांत –

इस्कीमिक ह्दय रोग, फुफ्फस अंत: शल्यता, श्वसनी अस्थमा, फुफ्फसावरणी नि:सरण, यक्ष्मा, अपावशोषण संलक्षण, अम्ल पेष्टिक रोग, विषागुज यकृतशोध एवं यकृत सिरोसिस।

स्तवकवृक्कशोथ एवं गोणिकावृक्कशोथ, वृक्कपात, संलक्षण, वृक्कीय संलक्षण, वृक्कवाहिका अतिरिक्तदाब, डायबीटीज मेलिटस के उपद्रव, स्कंदनविकार, ल्यूकीमिया अव-एवं-अति- थॉयराइडिज्म, मेनिन्जायटिस एवं एन्सेफेलाइटिस।

चिकित्सकीय समस्याओं में इमेजिंग, अल्ट्रासाउंड ईको कार्डियोग्राम, CT स्कैन, MRI, चिंता एवं अवसाद मनोविक्षिप्ति एवं विखंडित- मनस्कता तथा E.C.T.

2.

बाल रोग विज्ञान:

रोगप्रतिरोधीकरण, बेबी-फ्रेंडली अस्पताल, जन्मजात श्याव ह्दय रोग श्वसन विक्षोभ संलक्षण, श्वसनी- फु्फ्फुसशोथ, प्रमस्तिकीय नवजात कामला, IMNCI वर्गीकरण एवं प्रबंध PEM कोटिकरण एवं प्रबंध IARI एवं पांच वर्ष से छोटे शि शुओं की प्रवाहिका एवं उसका प्रबंध।

3.

त्वचा विज्ञान:

सोरिएसिस एलर्जिक डर्मेटाइटिस, स्केबीज, एक्जीमा विटिलिगो, स्टीवन-जॉनसन संलक्षण, लाइकेन प्लेनस

4.

सामान्य शल्य चिकित्सा:

खंडतालु खंडोष्ठ की रोगलक्षण विशेषता, कारण एवं प्रबंध के सिद्धांत।

स्वरयंत्रीय अर्बुद, मुख एवं ईसोफेगस अर्बुद।

परिधीय धमनी रोग, वैरिकोज वेन्स, महाधमनी संकुचन थायरॉइड, अधिवृक्क ग्रंथि के अर्बुद।

फोड़ा, कैंसर, स्तन का तंतुग्रंथि अर्बुद एवं ग्रथिलता पेप्टिक अल्सर रक्तस्राव, आंत्र यक्ष्मा, अल्सरेटिव कोलाइटिस, जठर कैंसर वृक्क मास, प्रोस्टेट कैंसर, हीमोथोरैक्स, पिताशय, वृक्क यूरेटर एवं मूत्राशय की पथरी, रेक्टम, एनस, एनल, कैनल, पिताशय एवं पितवाहिनी की शल्य दशाओं का प्रबंध।

स्प्लीनोमेगैली, कॉलीसिस्टाइटिस, पोर्टल अतिरिक्त दाब, यकृत फोड़ा, पेरीटोनाइटिस, पैंक्रियाज शीर्ष कार्सिनोमा, रीढ़ विभंग, कोली विभंग एवं अस्थि टयूमर।

एंडोस्कोपी

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

5.

प्रसूति विज्ञान एवं परिवार नियोजन समेत स्त्री रोग विज्ञान:

सगर्भता का निदान

प्रसव प्रबंध, तृतीय चरण के उपद्रव, प्रसवपूर्ण एवं प्रसवोतर रक्त स्त्राव, नवजात का पुनरूजीवन, असामान्य स्थिति एवं कठिन प्रसव का प्रबंध, कालपूर्व (प्रसव) नवजात का प्रबंध।

अरक्तता का निदान एवं प्रबंध।

सगर्भता का प्रीएक्लैप्सिया एवं टॉकसीमिया, रजोनिवृत्युत्तर संलक्षण का प्रबंध, इंट्रा-यूटेरीन युक्तियां, गोलियां, टयूबेक्टॉमी एवं वैसेक्टॉमी।

सगर्भता का चिकित्सकीय समापन जिसमें विधिक पहलू शामिल है।

ग्रीवा कैंसर

ल्यूरोटिया, श्रोणि वेदना, बंध्यता, डिसफंक्शनल यूटेरीन रक्तस्त्राव (DUB) अमीनोरिया, यूटरस का तंतुपेशी अर्बुद एवं भ्रंश।

6.

समुदाय कायचिकित्सा (निवारक एवं समाजिक काय चिकित्सा):

सिद्धांत, प्रणाली, उपागम एवं जानपादिक रोग विज्ञान का मापन; पोषण, पोषण संबंधी रोग/विकार एवं पोषण कार्यक्रम

स्वास्थ्य सूचना संग्रहण, विश्लेषण एवं प्रस्तुति।

निम्नलिखित के नियंत्रण/उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों के उद्देश्य, घटक एवं क्रांतिक विश्लेषण, मलेरिया, कालाआजार, फाइलेरिया एवं यक्ष्मा;

HIV/AIDS, यौन संक्रमित रोग एवं डेंगू

स्वास्थ्य देखभाल प्रदाय प्रणाली का क्रांतिक मूल्यांकन स्वास्थ्य प्रबंधन एवं प्रशासन: तकनीक, साधन, कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन

जनन एवं शिशु स्वास्थ्य के उद्देश्य, घटक, लक्ष्य एवं स्थिति, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य।

अस्पताल एवं औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंध।

पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 227–233 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।

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FAQ

चिकित्सा विज्ञान: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर

UPSC चिकित्सा विज्ञान वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?

दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।

UPSC चिकित्सा विज्ञान वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?

दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के अपने हिंदी शब्दों में है, उसके सीएसई 2026 नोटिस (पृ. 227–233) से।

चिकित्सा विज्ञान का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?

सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 227–233।