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वैकल्पिक विषय

वैकल्पिक विषय · विज्ञान, कृषि एवं चिकित्सा विज्ञान

UPSC भूविज्ञान वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026

पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 101–105) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।

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मुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे

भूविज्ञान — प्रश्न पत्र I

1.

सामान्य भूविज्ञान:

सौरतंत्र, उल्कापिंड, पृथ्वी का उद्भव एवं अंतरंग तथा पृथ्वी की आयु, ज्वालामुखी - कारण, प्रभाव, भारत के भूकंपी क्षेत्र, द्वीपाभ चाप, खाद्यों एवं महासागर-मध्य कटक; महाद्वीपीय अपोढ़; समुद्र अधस्तल विस्तार, प्लेट विवर्तनिकी; समस्थिति।

2.

भूआकृति विज्ञान एवं सुदूर-संवेदन:

भूआकृति विज्ञान की आधारभूत संकल्पना; अपक्षय एवं मृदानिर्माण; स्थलरूप, ढाल एवं अपवाह; भूआकृति चक्र एवं उनकी विवक्षा; आकारिकी एवं इसका संरचनाओं एवं अश्मिकी से संबंध; तटीय भूआकृति विज्ञान; खनिज पूर्वेक्षण में भूआकृति विज्ञान के अनुप्रयोग, सिविल इंजीनियरी; जल विज्ञान एवं पर्यावरणीय अध्ययन; भारतीय उपमहाद्वीप का भूआकृति विज्ञान, वायव फोटो एवं उनकी विवक्षा-गुण एवं सीमाएं; विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम; कक्षा- परिभ्रमण उपग्रह एवं संवेदन प्रणालियां; भारतीय दूर संवेदन उपग्रह; उपग्रह दत्त उत्पाद, भू-विज्ञान में दूर संवेदन के अनुप्रयोग; भोगोलिक सूचना प्रणालियां

(GIS)

एवं विश्वव्यापी अवस्थन प्रणाली (GPS) - इसका अनुप्रयोग।

3.

संरचनात्मक भूविज्ञान:

भूवैज्ञानिक मानचित्रण एवं मानचित्र पठन के सिद्धांत, प्रक्षेप आरेख, प्रतिबल एवं विकृति दीर्घवृत तथा प्रत्यास्थ, सुघट्य एवं श्यन पदार्थ के प्रतिबल-विकृति संबंध; विरूपित शैली में विकृति चिह्नक; विरूपण दशाओं के अंतर्गत खनिजों एवं शैलों का व्यवहार वलन; एवं भ्रंश वर्गीकरण एवं यांत्रिकी; वलनों, शल्कनों, सरेखणों, जोड़ों एवं भ्रंशों, विषमविन्यासों का संरचनात्मक विश्लेषण, क्रिव्स्टलन एवं विरूपण के बीच समय संबंध।

4.

जीवाश्म विज्ञान:

जाति-परिभाषा एवं नामपद्धति; गुरू जीवाश्म एवं सूक्ष्म जीवाश्म; जीवाश्म संरक्षण की विधियां; विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवाश्म; सह संबंध, पेट्रोलियम अनवेषण, पुराजलवायवी एवं पुरासमुद्रविज्ञानीय अध्ययनों में सूक्ष्म, जीवाश्मों का अनुप्रयोग; होमिनिडी एक्विडी एवं प्रोबोसीडिया में विकासात्मक प्रवृति; शिवालिक प्राणिजात; गोडंवाना वनस्पतिजात एवं प्राणिजात एवं इसका महत्व; सूचक जीवाश्म एवं उनका महत्व।

5.

भारतीय स्तरिकी:

स्तरिकी अनुक्रमों का वर्गीकरण; अश्मस्तरिक, जैवस्तरिक, कालस्तरिक एवं चुम्बस्तरिक तथा उनका अंतसंबंध/भारत की कैब्रियनपूर्व शैलों का वितरण एवं वर्गीकरण; प्राणिजात, वनस्पतिज्ञान एवं आर्थिक महत्व की दृष्टि से भारत की दृश्यजीवी शैलों के स्तरिक वितरण एवं अश्मविज्ञान का अध्ययन; प्रमुख सीमा समस्याएं-कैब्रियन/कैब्रियन पूर्व, पर्मियन/ ट्राइऐसिक, केटेशियस/तृतीयक एवं प्लायोसीन/प्लायोसीन, भूवैज्ञानिक अतीत में भारतीय उपमहाद्वीप में जलवायवी दशाओं, पुराभूगोल एवं आग्नेय सक्रियता का अध्ययन, भारत का स्तरिक ढांचा; हिमालय का उद्भव।

6.

जल भूविज्ञान एवं इंजीनियरी भूविज्ञान:

जल विज्ञान चक्र एवं जल का जननिक वर्गीकरण; अवपृष्ठ जल का संचलन; बृहत जवार; सरंध्रता, परक्राम्यता, द्रवचालिक चालकता; बृहत ज्वार; संरभ्रता, परक्राम्यता, द्रवचालिक चालकता, परगम्यता एवं संचयन गुणांक, ऐक्रिफर वर्गीकरण; लवणजल अंतर्वेधन, कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण; शैलों की जलधारी विशेषताएं; भूजल रसायनिकी; लवणजल अंतर्वेधन; कूपों के प्रकार, वर्षाजल संग्रहण; शैलों के इंजीनियरी गुण-धर्म, बांधों, सुरंगों, राजमार्गों, रेलमार्गों एवं पुलों के लिए भूवैज्ञानिक अन्वेषण; निर्माण सामग्री के रूप में शैल; भूस्खलन-कारण, रोकथाम एवं पुनर्वास; भूकंप रोधी संरचनाएं।

मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे

भूविज्ञान — प्रश्न पत्र II

1.

खनिज विज्ञान:

प्रणालियों एवं सममिति वर्गों में क्रिस्टलों का वर्गीकरण; क्रिस्टल संरचनात्मक संकेतन की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली; क्रिस्टल सममिति को निरूपित करने के लिए प्रक्षेप आरेखों का प्रयोग; ह्य किरण क्रिस्टलिकी के तत्व।

शैलकर सिलिकेट खनिज समूहों के भौतिक एवं रासायनिक गुण; सिलिकेट का संरचनात्मक वर्गीकरण; आग्नेय एवं कायांतरित शैलों के सामान्य खनिज, कार्बोनेट, फास्फेट, सल्फाइड एवं हेलाइड समूहों के खनिज; मृतिका खनिज।

सामान्य शैलकर खनिजों के प्रकाशिक गुणधर्म, खनिजों में बहुवगर्णता, विलोप कोण, द्विअपवर्तन (डबल रिफ्रैक्शन, बाइरेफ्रिजेंस), यमलन एवं परिक्षेपण ।

2.

आग्नेय एवं कायांतरित शैलिकी:

मैगमा जनन एवं क्रिस्टलन; ऐल्वाइट - ऐनॉर्थाइट का क्रिस्टलन: डायोप्साइड - एवं डायोप्साड- वोलास्टोनाइट-ऐनॉथाइट एवं डायोसाइड-वोलास्टोनाइट- सिलिका प्रणालियां; बॉवेन का अभिक्रया सिद्धांत; मैग्मीय विभेदन एवं स्वांगीकरण; आग्नेय शैलों के गठन एवं संरचनाओं का शैलजननिक महत्व; ग्रेनाइट, साइनाइड, डायोराइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अल्पसिलिक एवं अल्पल्पसिलिक समूहों, चार्नोकाइट, अनॉरर्थोसाइट एवं क्षारीय शैलों की शैलवर्णना एवं शैल जनन, कार्बोटाइट्स डेकन ज्वालामुखी शैल-क्षेत्र।

कायांतरण प्ररूप एवं कारक; कायांतरी कोटियां एवं संस्तर; प्रावस्था नियम; प्रादेशिक एवं संस्पर्श कायांतरण संलक्षणी; ACF एवं AKF आरेख; कायांतरी शैलों का गठन एवं संरचना; बालुकामय, मृण्मय एवं अल्पसिलिक शैलों का कायांतरण; खनिज समुच्चय पश्चगातिक कायांजरण; तत्वांतरण एवं ग्रेनाइटी भवन; भारत का मिग्नेटाइट, कणिकाश्म शैली प्रदेश।

3.

अवसादी शैलिकी:

अवसाद एवं अवसादी शैल निर्माण प्रक्रियाएं, प्रसंघनन एवं शिलीभवन, संखंडाश्मी एवं असंखंडाश्मी शैली-उनका वर्गीकरण, शैलवर्णना एवं निक्षेपण वातावरण, अवसादी संलक्षणी एवं जननक्षेत्र, अवसादी संरचनाएं एवं उनका महत्व; भारी खनिज एवं उनका महत्व; भारत की अवसादी द्रोणियां।

4.

आर्थिक भूविज्ञान:

अयस्क, अयस्क खनिज एवं गैंग, अयस्क का औसत प्रतिशत, अयस्क निक्षेपों का वर्गीकरण; खनिज निक्षेपों की निर्माण प्रक्रिया; अयस्क स्थानीकरण के नियंत्रण; अयस्क गठन एवं संरचनाएं; धातु जननिक युग एवं प्रदेश; एल्युमिनियम, क्रोनियम, ताम्र, स्वर्ण, लोह, लेड, जिंक, मेग्नीज, टिटेनियम, यूरेनियम एवं थोरियम तथा औद्योगिक खनिजों के महत्वपूर्ण भारतीय निक्षेपों का भूविज्ञान; भारत में कोयला एवं पेट्रोलियम निक्षेप; राष्ट्रीय खनिज नीति; खनिज संसाधनों का संरक्षण एवं उपयोग; समुद्री खनिज संसाधन एवं समुद्र नियम।

5.

खनन भूविज्ञान:

पूर्वक्षण की विधियां - भूवैज्ञानिक, भूभौतिक, भूरासायनिक एवं भू-वानस्पतिक; प्रतिचयन प्रविधियां; अयस्क निचय प्राक्कलन, धातु अयस्कों औद्योगिक खनिजों, समुद्री खनिज संसाधनों एवं निर्माण प्रस्तरों के अन्वेषण एवं खनन की विधियां; खनिज सज्जीकरण एवं अयस्क प्रसाधन।

6.

भूरासायनिकी एवं पर्यावरणीय भूविज्ञान:

तत्वों का अंतरिक्षी बाहुल्य, ग्रहों एवं उल्कापिंडों का संघटन, पृथ्वी की संरचना एवं संघटन एवं तत्वों का वितरण, लेश तत्व, क्रिस्टल रासायनिकी के तत्व-रासायनिक आबंध, समन्वय संख्या, समकृतिकता एवं बहुरूपता, प्रारंभिक उष्मागतिकी।

प्राकृतिक संकट - बाढ़, बृहत क्षरण, तटीय संकट, भूकंप एवं ज्वालामुखीय सक्रियता तथा न्यूनीकरण, नगरीकरण, खनन औद्योगिक एवं रेडियोसक्रिय अपरद निपटान, उर्वरक प्रयोग; खनन अपरद एवं फ्लाई ऐश सन्निक्षेपण के पर्यावरणीय प्रभाव; भौम एवं भू-पृष्ठ जल प्रदूषण, समुद्री प्रदूषण; पर्यावरण संरक्षण-भारत में विधायी उपाय; समुद्र तल परिवर्तन-कारण एवं प्रभाव।

पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 101–105 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।

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FAQ

भूविज्ञान: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर

UPSC भूविज्ञान वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?

दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।

UPSC भूविज्ञान वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?

दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के अपने हिंदी शब्दों में है, उसके सीएसई 2026 नोटिस (पृ. 101–105) से।

भूविज्ञान का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?

सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 101–105।