वैकल्पिक विषय · विज्ञान, कृषि एवं चिकित्सा विज्ञान
UPSC वनस्पति विज्ञान वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026
पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 71–74) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।
Read in Englishसामान्य अध्ययन में कहाँ काम आता है
यह वैकल्पिक विषय GS III में जैव विविधता, जैव प्रौद्योगिकी एवं संरक्षण से जुड़ता है।
यह हमारी टिप्पणी है, UPSC की नहीं।
मुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे
वनस्पति विज्ञान — प्रश्न पत्र I
सूक्ष्मजैविकी एवं पादपरोग विज्ञान:
विषाणु, वाइरॉइड, जीवाणु, फंगाई एवं माइक्रोप्लाज्मा संरचना एवं जनन। बहुगुणन, कृषि, उद्योग, चिकित्सा तथा वायु एवं मृदा एवं जल में प्रदूषण-नियंत्रण में सूक्ष्मजैविकी के अनुप्रयोग, प्रायोन एवं प्रायोन घटना। विषाणुओं, जीवाणुओं, माइक्रोप्लाज्मा, फंगाई तथा सूत्रकृमियों द्वारा होने वाले प्रमुख पादपरोग, संक्रमण और फैलाव की विधियां, संक्रमण तथा रोग प्रतिरोध के आण्विक आधार। परजीविता की कार्यिकी और नियंत्रण के उपाय। कवक आविष, मॉडलन एवं रोग पूर्वानुमान, पादप संगरोध।
क्रिप्टोगेम्स:
शैवाल, कवक, लाइकन, ब्रायोफाइट, टेरीडोफाइट-संरचना और जनन के विकासात्मक पहलू, भारत में क्रिप्टोगेम्स का वितरण और उनका परिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व।
पुष्पोदभिद:
अनावृत बीजी: पूर्व अनावृत बीजी की अवधारणा। अनावृतबीजी का वर्गीकरण और वितरण। साइकेडेलीज, गिंगोऐजीज, कोनीफेरेलीज और नीटेलीज के मुख्य लक्षण, संरचना व जनन साईंकेडोफिलिकेलीज, बेन्नेटिटेलीज तथा कार्डेटेलीज का सामान्य वर्णन। भू वैज्ञानिक समयमापनी, जीवश्म प्रकार एवं उनके अध्ययन की विधियां, आवृतबीजी : वर्गिकी, शारीरिकी, भ्रूण विज्ञान, परागाणुविज्ञान और जातिवृत्त, वर्गीकी सौपान, वानस्पतिक नामपद्धति के अंतर्राष्ट्रीय कूट, संख्यात्मक वर्गिकी एवं रसायन-वर्गिकी, शारीरिकी भ्रूण विज्ञान एवं परागाणु विज्ञान से साक्ष्य। आवृत बीजियों का उदगम एवं विकास, आवृत बीजियों के वर्गीकरण की विभिन्न प्रणालियों का तुलनात्मक विवरण, आवृत बीजी कुलों का अध्ययन-मैग्नोलिएसी, रैननकुलेसी, बैसीकेसी, रोजेसी, फेबेसी, यूफार्बिएसी, मालवेसी, डिप्टेरोकार्पेसी, एपिएसी, एस्क्लेपिडिएसी, वर्बिनेसी, सोलैनेसी, रूबिएसी, कुकुरबिटेली, ऐस्टीरेसी, पोएसी, ओरकेसी, लिलिएसी, म्यूजेसी एवं ऑर्किडेसी। रंध्र एवं उनके प्रकार, ग्रंथीय एवं अग्रंथीय ट्राइकोम, विसंगत द्वितीयक वृद्धि, सी-3 और सी-4 पौधों का शरीर, जाइलम एवं फ्लोएम विभेदन, कास्ठ शरीर नर और मादा युग्मकोदभिद का परिवर्धन, परागण, निषेचन। भ्रूणपोष- इसका परिवर्धन और कार्य, भ्रूण परिवर्धन के स्वरूप। बहुभ्रूणता, असंगजनन, परागाणु विज्ञान के अनुप्रयोग, पराग भंडारण एवं टेस्ट ट्यूब निषेचन सहित प्रयोगात्मक भ्रूण विज्ञान।
पादप संसाधन विकास:
पादन ग्राम्यन एवं परिचय, कृष्ट पौधों का उदभव, उदभव संबंधी वेवीलोव के केन्द्र, खाद्य, चारा, रेशों, मसालों, पेय पदार्थों, खाद्यतेलों, औषधियों, स्वापकों, कीटनाशियों, इमारती लकड़ी, गोंद, रेजिनों तथा रंजकों के स्रोतों के रूप में पौधे, लेटेक्स, सेलुलोस, मंड और उनके उत्पाद, इत्रसाजी, भारत के संदर्भ में नुकुल वनस्पतिकी का महत्व। ऊर्जा वृक्षारोपण, वानस्पतिक उद्यान और पादपालय।
आकारजनन:
पूर्ण शक्तता, ध्रुवणता, सममिति और विभेदन, कोशिका, ऊतक, अंग एवं जीवद्रव्यक संवर्धन। कायिक संकर और द्रव्य संकर, माइक्रोप्रोपेगेशन, सोमाक्लोनल विविधता एवं इसका अनुप्रयोग, पराग अगुणित, एम्ब्रियोरेस्क्यू विधियां एवं उनके अनुप्रयोग।
मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे
वनस्पति विज्ञान — प्रश्न पत्र II
कोशिका जैविकी:
कोशिका जैविकी की प्रविधियां, प्राक्केन्द्रकी और सुकेन्द्रकी कोशिकाएं – संरचनात्मक और परासंचनात्मक बारीकियां, कोशिका बाहय आधात्री अथवा कोशिकाबाहय आव्यूह (कोशिका भिति) तथा झिल्लियों की संरचना और कार्य-कोशिका आसंजन, झिल्ली अभिगमन तथा आशयी अभिगमन, कोशिका अंगकों (हरित लवक सूत्र कणिकाएं, ईआर, डिक्टियोसोम, राइबोसोम, अंत: काय, लयनकाय, परऑक्सीसोम) की संरचना और कार्य, साइटोस्केलेटन एवं माइक्रोटयूब्यूल्स, केन्द्रक, केन्द्रिक, केन्द्र की रंध्र सम्मिश्र, क्रोमेटिन एवं न्यूक्लियोसोम। कोशिक संकेतन और कोशिकाग्राही, संकेत परिक्रमण, समसूत्रण विभाजन, कोशिका चक्र का आणविक आधार, गुणसूत्रों में संख्यात्मक और संरचनात्मक विभिन्ताएं तथा उनका महत्व, क्रोमेटिन व्यवस्था एवं जीनोम संवेष्टन, पॉलिटीन गुणसूत्र, बी-गुणसूत्र-संरचना व्यवहार और महत्व।
आनुवंशिकी, आण्विक, जैविकी और विकास :
आनुवंशिकी का विकास और जीन बनाम युग्मविकल्पी अवधारण(कूट विकल्पी), परिमाणात्मक आनुवंशिकी तथा बहुकारक अपूर्ण प्रभाविता, बहुजननिक वंशागति, बहुविकल्पी सहलग्नता तथा विनियम-आण्विक मानचित्र (मानचित्र प्रकार्य की अवधारणा) सहित जीन मानचित्रण की विधियां, लिंग गुणसूत्र तथा लिंग सहलग्न वंशागति, लिंग निर्धारण और लिंग विभेदन का आण्विक आधार, उत्परिवर्तन (जैव रासायनिक और आण्विक आधार) कोशिका द्रव्यी वंशागति एवं कोशिकाद्रव्यी जीन (नर बंध्यता की आनुवंशिकी सहित)।
न्यूक्लीय अम्लों और प्रोटीनों की संरचना तथा संश्लेषण, आनुवंशिक कूट और जीन अभिव्यक्ति का नियमन, जीन नीरवता, बहुजीन कुल, जैव विकास-प्रमाण, क्रियाविधि तथा सिद्धांत, उदभव तथा विकास में आरएनए की भूमिका।
पादप प्रजनन, जैव प्रौद्योगिकी तथा जैव सांख्यिकी :
पादप प्रजनन की विधियां-आप्रवेश, चयन तथा संकरण। (वंशावली, प्रतीप संकर, सामूहिक चयन व्यापक पद्धति) उत्परिवर्तन, बहुगुणिता, नरबंध्यता तथा संकर ओज प्रजनन। पादप प्रजनन में असंगजनन का उपयोग। डीएनए अनुक्रमण, आनुवंशिकी इंजीनियरी-जीन अंतरण की विधियां, पारजीनी सस्य एवं जैव सुरक्षा पहलू, पादप प्रजनन में आण्विक चिन्ह्क का विकास एवं उपयोग। उपकरण एवं तकनीक-प्रोब, दक्षिणी ब्लास्टिंग, डीएनए फिंगर प्रिंटिग, पीसीआर एवं एफआईएसएच, मानक विचलन तथा विचरण गुणांक (सीबी), सार्थकता परीक्षण, (जैड- परीक्षण, टी-परीक्षण तथा कार्ड-वर्ग परीक्षण), प्राथमिकता तथा बंटन (सामान्य, द्विपदी तथा प्वासों बंटन) संबंधन तथा समाश्रयण।
शरीर क्रिया विज्ञान तथा जैव रसायनिकी:
जल संबंध, खनिज पोषण तथा ऑयन अभिगमन, खनिज न्यूनताएं, प्रकाश संश्लेषण-प्रकाश रसायनिक अभिक्रयाएं, फोटो फोस्फोरिलेशन एवं कार्बन फिक्सेशन पाथवे, सी 3, सी 4 और कैम दिशामार्ग, फ्लोएम परिवहन की क्रियाविधि, श्वसन (किण्वन सहित अवायुजीवीय और वायुजीवीय) - इलेक्ट्रॉन अभिगमन श्रृंखला और ऑक्सीकरणी फोस्फोरिलेशन, फोटोश्वसन, रसोपरासरणी सिद्धांत तथा एटीपी संश्लेषण, लिपिड उपापचय, नाइट्रोजन उपापचय, किण्व, सहकिण्व, ऊर्जा अंतरण तथा ऊर्जा संरक्षण। द्वितीयक उपापचयों का महत्व, प्रकाशग्रहियों के रूप में वर्णक (प्लैस्टिडियल वर्णक तथा पादप वर्णक), पादप संचलन दीप्तिकालिता तथा पुष्पन, बसंतीकरण, जीर्णन, वृद्धि पदार्थ-उनकी रासायनिक प्रकृति, कृषि बागवानी में उनकी भूमिका और अनुप्रयोग, वृद्धि संकेत, वृद्धिगतियां, प्रतिबल शारीरिकी (ताप, जल, लवणता, धातु), फल एवं बीज शारीरिक बीजों की प्रसुप्ति, भंडारण तथा उनका अंकुरण फल का पकना- इसका आण्विक आधार तथा मैनिपुलेशन।
पारिस्थितिकी तथा पादप भूगोल:
परितंत्र की संकल्पना, पारिस्थितिकी कारक, समुदाय की अवधारणाएं और गतिकी पादन, अनुक्रमण जीव मंडल की अवधारणा परितंत्र, संरक्षण प्रदूषण और उसका नियंत्रण (फाइटोरेमिडिएशन सहित) पादप सूचक पर्यावरण, (संरक्षण) अधिनियम।
भारत में वनों के प्ररूप - वनों का परिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व, वनरोपण, वनोन्मूलन एवं सामाजिक वानिकी संकटापन्न पौधे, स्थानिकता, IUCN कोटियां, रेड डाटा बुक, जैव विविधता एवं उसका संरक्षण, संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क, जैव विविधता पर सम्मेलन, किसानों के अधिकार एवं बौद्धिक संपदा अधिकार, संपोषणीय विकास की संकल्पना, जैव-भू-रासायनिक चक्र, भूमंडलीय तापन एवं जलवायु परिवर्तन, संक्रामक जातियां, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, भारत के पादप भूगोलीय क्षेत्र।
पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 71–74 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।
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FAQ
वनस्पति विज्ञान: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर
UPSC वनस्पति विज्ञान वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?
दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।
UPSC वनस्पति विज्ञान वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?
दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के अपने हिंदी शब्दों में है, उसके सीएसई 2026 नोटिस (पृ. 71–74) से।
वनस्पति विज्ञान का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?
सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 71–74।