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वैकल्पिक विषय

वैकल्पिक विषय · इंजीनियरी

UPSC सिविल इंजीनियरी वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026

पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 78–85) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।

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मुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे

सिविल इंजीनियरी — प्रश्न पत्र I

1.

इंजीनियरी यांत्रिकी पदार्थ सामर्थ्य तथा संरचनात्मक विश्लेषण 1.1 इंजीनियरी यांत्रिकी :

मात्रक तथा विमाएं, SI मात्रक, सदिश, बल की संकल्पना, कण तथा दृढ़ पिंड संकल्पना, संगामी, असंगामी तथा समतल पर समांतर बल, बल आघूर्ण, मुक्त पिंड आरेख, सप्रतिबंध साम्यावस्था, कल्पित कार्य का सिद्धांत, समतुल्य बल प्रणाली।

प्रथम तथा द्वितीय क्षेत्र आघूर्ण, द्रव्यमान जड़त्व आघूर्ण स्थैतिक घर्षण।

शुद्धगतिकी तथा गतिकी:

कातीय निर्देशांक शुद्धगतिकी, समान तथा असमान त्वरण के अधीन गति, गुरूत्वाधीन गति, कणगतिकी, संवेग तथा ऊर्जा सिद्धांत, प्रत्यास्था पिंडों का संघटन, दृढ़ पिंडों का घूर्णन। 1.2 पदार्थ-सामर्थ

सरल प्रतिबल तथा विकृति, प्रत्यास्थ स्थिरांक, अक्षत:भारित संपीडांग, अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण, सरल बंकन का सिद्धांत, अनुप्रस्थ काट का अपरूपण प्रतिबल वितरण, सामार्थ्य धरण।

धरण विक्षेप: मैकाले विधि, मोर की आघूर्ण क्षेत्र विधि, अनुरूप धरण विधि, एकांक भार विधि, शाफ्ट की ऐंठन, स्तंभों का प्रत्यास्थ स्थायित्व, आयलर, रेनकाईन तथा सीकेट सूत्र। 1.3 संरचनात्मक: विश्लेषण :

कास्टिलियानोस प्रमेय I तथा II, धरण और कील संधियुक्त कैंची में प्रयुक्त संगत विकृति की एकांक भार विधि, ढाल विक्षेप, आघूर्ण वितरण।

वेलन भार और प्रभाव रेखाएं: धरण के परिच्छेद पर अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण के लिए प्रभाव रेखाएं, गतिशील भार प्रणाली द्वारा धरण चक्रमण में अधिकतम अपरूपण बल तथा बंकन आघूर्ण हेतु मानदंड, सरल आलंबित समतल कील संधि युक्त कैंची हेतु प्रभाव रेखाएं।

डाट: त्रिकील, द्विकील तथा आबद्ध डाट-पर्शुका लंघीयन एवं तापमान प्रभाव।

विश्लेषण की आव्यूह विधि: अनिर्धारित धरण तथा दृढ़ ढांचों का बल विधि तथा विस्थापन विधि से विश्लेषण धरण और ढांचों का प्लास्टिक विश्लेषण : प्लास्टिक बंकन सिद्धांत, प्लास्टिक विश्लेषण स्थैतिक प्रणाली; यांत्रिकी विधि।

असममित बंकन: जड़त्व आघूर्ण, जड़त्व उत्पाद, उदासीन अक्ष और मुख अक्ष की स्थिति, बंकन प्रतिबल की परिगणना।

2.

संरचना अभिकल्प: इस्पात, कंक्रीट तथा चिनाई संरचना। 2.1 संरचनात्मक इस्पात अभिकल्प :

संरचनात्मक इस्तात: सुरक्षा गुणक और भार गुणक। कवचित तथा वेल्डिग जोड़ तथा संयोजन तनाव तथा सपीडांग इकाइयों का अभिकल्प, संघटित परिच्छेद का धरण, कवचित तथा वेल्डिग प्लेट गर्डर, गैंदी गर्डर, बैटन एवं लेसिंगयुक्त स्टेंचियनस। 2.3 कंक्रीट तथा चिनाई संरचना का अभिकल्प : मिश्र अभिकल्प की संकल्पना, प्रबलित क्रंक्रीट: कार्यकारी प्रतिबल तथा सीमा अवस्था विधि से अभिकल्प-, IS पुस्तिकाओं की सिफारिशों, वन-वे- एवं टू-वे स्लैब की डिज़ाइन, सोपान स्लैब, आयताकार T एवं L कांट के सरल एवं सतत धरण, उत्केन्द्रता सहित अथवा रहित प्रत्यक्ष भार के अंतर्गत संपीडांग इकाइयां, विलगित एवं संयुक्त नीव, केंटीलीवन एवं काउंटर फोर्ट प्ररूप प्रतिधारक भित्ति।

जलटंकी; पृथ्वी पर रखे आयताकार एवं गोलाकार टंकियों की अभिकल्पन आवश्यकताएं, पूर्ण प्रतिबलित कंक्रीट: पूर्व प्रतिबलित के लिए विधियां और प्रणालियों, स्थिरक स्थान, कार्यकारी प्रतिबल आधारित आनति के लिए परिच्छेद का विश्लेषण और अभिकल्प, पूर्व प्रतिबलित हानि।

3.

तरल यांत्रिकी, मुक्त वाहिका प्रवाह एवं द्रवचालित मशीनें 3.1 तरल यांत्रिकी :

तरल गुणधर्म तथा सरल गति में उनकी भूमिका, तरल स्थैतिकी जिसमें समतल तथा वक्र सतह पर कार्य करने वाले बल भी शामिल हैं। तरल प्रवाह की शुद्धगतिकी एवं गतिकी : वेग और त्वरण, सरिता रेखाएं, सातल्य समीकरण, आघूर्णी तथा घूर्णी प्रवाह, वेग वि भव एवं सरिता फलन सांतत्य संवेग एवं ऊर्जा समीकरण, नेवियर स्टोक्स समीकरण, आयलर गति समीकरण, तरल प्रवाह, स्लूइट गेट, वियर। 3.2 विमीय विश्लेषण एवं समरूपता :

बकिं घम Pi- प्रमेय, विमारहित प्राचल। 3.3 स्तरीय प्रवाह:

समांतर, अचल एवं चल प्लेटों के बीच स्तरीय प्रवाह, ट्यूब द्वारा प्रवाह। 3.4 परिसीमा परत :

चपटी प्लेट पर स्तरीय एवं विक्षुब्घ परिसीमा परत, स्तरीय उपपरत, मसृण एवं रूक्ष परिसीमाए, विकर्ष एवं लिफ्ट।

पाइपों द्वारा विक्षुब्ध प्रवाह: विक्षुब्ध प्रवाह के अभिलक्षण, वेग वितरण एवं पाइप घर्षण गुणक की विवि धता, जलदाब प्रवणता रेखा तथा पूर्ण ऊर्जा रेखा। 3.5 मुक्त वाहिका प्रवाह :

समान एवं असमान प्रवाह, आघूर्ण एवं ऊर्जा संशुद्धि गुणक, विशिष्ट उर्जा तथा विशिष्ट बल, क्रांतिक गहराई, तीव्र परिवर्ती प्रवाह, जलोच्छाल, क्रमश: परिवर्ती प्रवाह, पृष्ठ परिच्छेद का वर्गीकरण, नियंत्रण काट, परिवर्ती प्रवा ह समीकरण के समाकलन की सोपान विधि। 3.6 द्रवचालित यंत्र तथा जलशक्ति:

द्रवचालित टरबाइन, प्रारूप वर्गीकरण, टरबाइन चयन निष्पादन प्राचल, नियंत्रण, अभिलक्षण, विशिष्ट गति, जलशक्ति विकास के सिद्धान्त।

4.

भू-तकनीकी इंजीनियरी:

मृदा के प्रकार एवं संरचना, प्रवणता तथा कण आकार वितरण, गाढ़ता सीमाएं, मृदा जल कोशिकीय तथा सरंचनात्मक प्रभावी प्रतिबल तथा रंध्र जल दाब, प्रयोगशाला निर्धारण, रिसन दाब, बालु पंक अवस्था-कर्तन सामर्थ्य परीक्षण-मोर कुलांब संकल्पना–मृदा संहनन- प्रयोगशाला एवं क्षेत्र परीक्षण, संपीड़यता एवं संपिंडन संकल्पना संपिंडन सिद्धांत संपी़ड़यता स्थिरण विश्लेषण, भूदाब सिद्धांत एक प्रति धारक भिति के लिए विश्लेषण, चादरी स्थूणाभिति एवं बंधनयुक्त खनन के लिए अनुप्रयोग मृदा धारण क्षमता विश्लेषण के उपागम - क्षेत्र परीक्षण - स्थि रण विश्लेषण - भूगमन ढाल का स्थायित्व, मृदाओं की अपपृष्ठ खनन विधियां।

नींव संरचना, नींव के प्रकार एवं चयन मापदंड -नींव अभिकल्प।

मापदंड–पाद एवं पाइल प्रतिबल वितरण विश्लेषण, पाइल समूह कार्य-पाइल भार परीक्षण भूतल सुधार प्रविधियां।

मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे

सिविल इंजीनियरी — प्रश्न पत्र II

1.

निर्माण तकनीकी, उपकरण, योजना और प्रबंध: 1.1 निर्माण तकनीकी:

इंजीनियरी सामग्री:

निर्माण सामग्री के निर्माण में उनके प्रयोग की दृष्टि से भौतिक गुणधर्म: पत्थर, ईंट तथा टाइल, चूना, सीमेंट तथा वि विध सुरखी मसाला एवं कंक्रीट, लोह सीमेंट के विशिष्ट उपयोग, तंतु प्रबलि त C.C., उच्च सामर्थ्य कंक्रीट, इमारती लकड़ी: गुणधर्म एवं दोष, सामान्य संरक्षण, उपचार।

कम लागत के आवास, जन आवास, उच्च भवनों जैसे वि शेष उपयोग हेतु सामग्री उपयोग एवं चयन । 1.2 निर्माण:

ईंट पत्थर ब्लाकों के उपयोग के चिनाई सिद्धांत-निर्माण विस्तारण एवं सामर्थ्य अभिलक्षण।

प्लास्टर, प्वाइंटिंग, फ्लोरिंग, रूफिंग एवं निर्माण अभिलक्षणों के प्रकार।

भवनों के सामान्य मरम्मत कार्य।

रहिवासों एवं वि शेष उपयोग के लिए भवनों की कार्यात्मक योजना के सिद्धांत-भवन कोड उपबंध।

विस्तृत एवं लगभग आकलन के आधारभूत सिद्धांत – विनिर्देश लेखन एवं दर विश्लेषण-स्थावर

सम्पत्ति मूल्यांकन के सिद्धांत।

मृदाबंध के लिए मशीनरी, कंक्रीटकरण एवं उनका विशिष्ट उपयोग- उपकरण चयन को प्रभावित करने वाले कारक – उपकरणों की प्रचालन लागत। 1.3 निर्माण योजना एवं प्रबंध:

निर्माण कार्यकलाप-कार्यक्रम - निर्माण उद्योग का संगठन - गुणता आश्वासन सिद्धांत, नेटवर्क के आधारभूत सिद्धांतों का उपयोग, CPM एवं PERT के रूप में विश्लेषण - निर्माण मॉनीटरी, लागत इष्टतमीकरण एवं संसाधन नियतन में उनका उपयोग, आर्थिक विश्लेषण एवं विधि के आधारभूत सिद्धांत। परियोजना लाभदायकता -

वित्तीय योजना के बूट उपागम के आधारभूत सिद्धांत सरल टौल नियतीकरण मानदंड।

2.

सर्वेक्षण एवं परिवहन इंजीनियरी 2.1 सर्वेक्षण:

CE कार्य की दूरी एवं कोण मापने की सामान्य विधियां एवं उपकरण, प्लेन टेबल में उनका उपयोग, चक्रम सर्वेक्षण समतलन, त्रिकोणन, रूपरेखण एवं स्थलाकृतिक मानचित्र, फोटोग्राममि ति एवं दूर-संवेदन के सामान्य सिद्धांत। 2.2 रेलवे इंजीनियरी:

स्थायी पथ अवयव, प्रकार एवं उनके प्रकार्यटर्न एवं क्रासिंग के प्रकार्य एवं अभिकल्प घटक - ट्रैक के भूमि तीय अभिकल्प की आवश्यकता – स्टेशन एवं यार्ड का अभिकल्प। 2.3 राजमार्ग इंजीनियरी:

राजमार्ग संरेखन के सिद्धांत, सड़कों का वर्गीकरण एवं ज्यामितिक अभिकल्प अवयव एवं सड़कों के मानक, नम्य एवं दृढ कुट्टिम हेतु कुट्टिम संरचना, कुट्टिम के अभिकल्प सिद्धांत एवं क्रियापद्धति, प्ररूपी निर्माण विधियां एवं स्थायीकृत मृदा, WBM बिटुमेनी निर्माण एवं CC सड़कों के लिए सामग्री, बहिस्तल एवं अधस्तल अपवाह विन्यास-पुलिस सरंचनाएं, कुट्टिम विक्षोभ एवं उन्हें उपरिशायी द्वारा मजबूती प्रदान करना। यातायात सर्वेंक्षण एवं यातायात आयोजना में उनके अनुप्रयोग- प्रणालित, इन्टरसेक्शन एवं घूर्णी आदि के लिए अभिकल्प वि शेषताएं –सिगनल अभिकल्प - मानक यातायात चिन्ह एवं अंकन।

3.

जल विज्ञान, जल संसाधन एवं इंजीनियरी 3.1 जल विज्ञान:

जलीय चक्र, अवक्षेपण, वाष्पीकरण, वाष्पोत्सर्जन, अंत: स्यदन, अधिभार प्रवाह, जलारेख, बाढ़ आवृति विश्लेषण, जलाशय द्वारा बाढ़ अनुशीलन, वाहिका प्रवाह मार्गाभिगमन- मस्किंग्म विधि। 3.2 भू-तल प्रवाह: विशिष्ट लब्धि, संचयन गुणांक, पारगम्यता गुणांक, परिरूद्ध तथा अपरिरूद्ध स्थितियों के अंतर्गत एक कूप के भीतर अरीय प्रवाह । 3.3 जल संसाधन इंजीनियरी:

भू तथा धरातल जल संसाधन, एकल तथा बहुउद्देशीय परियोजनाएं, जलाशय की संचयन क्षमता, जलाशय हानियां, जलाशय अवसादन । 3.4 सिंचाई इंजीनियरी:

(क)

फसलों के लिए जल की आवश्यकता: क्षयी उपयोग, कृति तथा डेल्टा, सिंचाई के तरीके तथा उनकी दक्षताएं।

(ख)

नहरें: नहर सिंचाई के लिए आबंटन पद्धति, नहर क्षमता, नहर की हानियां, मुख्य तथा वितरिका नहरों का संरेखन-अत्यधिक दक्ष काट, अस्तरित नहरें, उनके डिजाइन, रिजीम सिद्धांत, क्रांतिक अपरूपण प्रतिबल, तलभार।

(ग)

जल-ग्रस्तता: कारण तथा नियंत्रण, लवणता।

(घ)

नहर संरचना: अभिकल्प, दाबोच्चता नियामक, नहर प्रपात, जलवाही सेतु, अवनलिका एवं नहर विकास का मापन।

(ड.)

द्विपरिवर्ती शीर्ष कार्य: पारगम्य तथा अपारगम्य नीवों पर बाधिका के सिंद्धांत और डिजाइन, खोसला सिद्धांत, ऊर्जा क्षय ।

(च)

संचयन कार्य: बॉधों की किस्में, डिजाइन, दृढ़ गुरूत्व के सिद्धांत, स्थायित्व विश्लेषण।

(छ)

उत्प्लव मार्ग: उत्प्लव मार्ग के प्रकार, ऊर्जा क्षय।

(ज)

नदी प्रशिक्षण: नदी प्रशिक्षण के उद्देश्य, नदी प्रशिक्षण की विधियां।

4.

पर्यावरण इंजीनियरी: 4.1 जल पूर्ति:

जल मांग की प्रागुक्त्ति, जल की अशुद्धता तथा उसका म हत्व, भौतिक रासायनिक तथा जीवाणु विज्ञान संबंधी विश्लेषण, जल से होने वाली बीमारियों, पेय जल के लिए मानक। 4.2 जल का अंतर्ग्रहण: जल उपचार : स्कंदन के सिंद्धांत, ऊर्णन तथा सादन, मंद-, द्रुत-, दाब फिल्टर, क्लोरीनीकरण, मृदूकरण, स्वाद, गंध तथा लवणता को दूर करना। 4.3 वाहित मल व्यवस्था :

घरेलू तथा औद्योगिक अपशिष्ट, झंझावात वाहित मल-पृथक और संयुक्त प्रणालियां, सीवरों द्वारा बहाव, सीवरों का डिजाइन। 4.4 सीवेज लक्षण :

BOD, COD, ठोस पदार्थ, विलीन ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और TOC सामान्य जल मार्ग तथा भूमि पर निष्कासन के मानक। 4.5 सीवेज उपचार :

कार्यकारी नियम, इकाइयां, कोष्ठ, आवसादन टैंक, च्वापी फिल्टर, आक्सीकरण पोखर, उत्प्रेरित अवपंक प्रक्रिया, सैप्टि क टैंक, अवपंक निस्तारण, अवशिष्ट जल का पुन: चालन। 4.6 ठोस अपशिष्ट :

गांवों और शहरों में संग्रहण एवं विस्तारण, दीर्घकालीन कुप्रभावों का प्रबंध।

5.

पर्यावरणीय प्रदूषण:

अवलंबित विकास, रेडियोऐक्टिव अपशिष्ट एवं निष्कासन, उष्मीय शक्ति संयत्रों खानों, नदी घाटी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी प्रभाव मूल्यांकन, वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम।

पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 78–85 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।

इंजीनियरी के अन्य वैकल्पिक विषय

FAQ

सिविल इंजीनियरी: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर

UPSC सिविल इंजीनियरी वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?

दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।

UPSC सिविल इंजीनियरी वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?

दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के अपने हिंदी शब्दों में है, उसके सीएसई 2026 नोटिस (पृ. 78–85) से।

सिविल इंजीनियरी का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?

सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 78–85।