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वैकल्पिक विषय

वैकल्पिक विषय · मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान

UPSC अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम 2026

पेपर 1 और पेपर 2, UPSC के सीएसई 2026 के हिंदी नोटिस (पृ. 89–93) से शब्दशः। हर पेपर 250 अंक और तीन घंटे का।

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सामान्य अध्ययन में कहाँ काम आता है

यह वैकल्पिक विषय GS III में भारतीय अर्थव्यवस्था, संवृद्धि एवं बजट से जुड़ता है।

GS 3 पाठ्यक्रम →

यह हमारी टिप्पणी है, UPSC की नहीं।

मुख्य परीक्षा पेपर VI · 250 अंक · 3 घंटे

अर्थशास्त्र — प्रश्न पत्र I

1.

उन्नत व्यष्टि अर्थशास्त्र:

(क)

कीमत निर्धारण के मार्शलियन एवं वालरासियम उपागम।

(ख)

वैकल्पिक वितरण सिद्धांत: रिकॉर्डों काल्डोर, कलीकी।

(ग)

बाजार संरचना: एकाधिकारी प्रतियोगिता, द्वि अधिकार, अल्पाधिकार।

(घ)

आधुनिक कल्याण मानदंड: परेटो हिक्स एवं सितोवस्की, ऐरो का असंभावना प्रमेय, ए.के. सैन का सामाजिक कल्याण फलन।

2.

उन्नत समष्टि अर्थशस्त्र:

नियोजन आय एवं ब्याज दर निर्धारण के उपागम: क्लासिकी, कीन्स (IS-LM) वक्र नवक्लासिकी संश्लेषण एवं नया क्लासिकी, ब्याज दर निर्धारण एवं ब्याज दर संरचना के सिद्धांत।

3.

मुद्रा बैकिंग एवं वित्त:

(क)

मुद्रा की मांग की पूर्ति: मुद्रा का मुद्रा गुणक मात्रा सिद्धांत (फिशर, पीक फ्राइडमैन) तथा कीन का मुद्रा के लिए मांग का सिद्धांत, बंद और खुली अर्थव्यवस्था में मुद्रा प्रबंधन के लक्ष्य एवं साधन, केन्द्रीय बैंक और खजाने के बीच संबंध, मुद्रा की वृद्धि दर पर उच्चतम सीमा का प्रस्ताव।

(ख)

लोक वित्त और बाजार अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका: पूरी के स्वीकरण में, संसाधनों का विनिधान और वितरण और संवृद्धि, सरकारी राजस्व के स्रोत, करों एवं उपदानों के रूप, उनका भार एवं प्रभाव, कराधान की सीमाएं, ऋण, क्राउडिंग आउट प्रमाण एवं ॠण लेने की सीमाएं, लोक व्यय एवं उसके प्रभाव।

4.

अंतर्राष्ट्रीय अर्थशस्त्र:

(क)

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के पुराने और नए सिद्धांत

(i)

तुलनात्मक लाभ

(ii)

व्यापार शर्ते एवं प्रस्ताव वक्र

(iii)

उत्पाद चक्र एवं निर्णायक व्यापार सिद्धांत

(iv)

व्यापार, संवृद्धि के चालक के रूप में और खुली अर्थव्यवस्था में अवविकास के सिद्धांत

(ख)

संरक्षण के स्वरूप: टैरिफ एवं कोटा

(ग)

भुगतान शेष समायोजन; वैकल्पिक उपागम

(i)

कीमत बनाम आय, नियम विनियम दर के अधीन आय के समायोजन।

(ii)

मिश्रित नीति के सिद्धांत।

(iii)

पूंजी चलिष्गुणता के अधीन विनियम दर समायोजन।

(iv)

विकासशील देशों के लिए तिरती दरें और उनकी विवक्षा, मुद्रा(करेंसी) बोर्ड।

(v)

व्यापार नीति एवं विकासशील देश।

(vi)

BPO, खुली अर्थव्यवस्था समष्टि मॉडल में समायोजन तथा नीति समन्वय।

(vii)

सट्टा।

(viii)

व्यापार गुट एवं मौद्रिक संघ।

(ix)

विश्व व्यापार संगठन (WTO) TRIM, TRIPS, घरेलू उपाय WTO बातचीत के विभिन्न चक्र।

5.

संवृद्धि एवं विकास:

(क) (i)

संवृद्धि के सिद्धांत; हैरॅड का मॉडल

(ii)

अधिशेष श्रमिक के साथ विकास का ल्यूइस मॉडल

(iii)

संतुलित एवं असंतुलित संवृद्धि

(iv)

मानव पूंजी एवं आर्थिक वृद्धि

(ख)

कम विकसित देशों का आर्थिक विकास का प्रक्रम: आर्थिक विकास एवं संरचना परिवर्तन के विषय में मिडिल एवं कुजमेंट्स, कम विकसित देशों के आर्थिक विकास में कृषि की भूमिका।

(ग)

आर्थिक विकास एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश, बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।

(घ)

आयोजना एवं आर्थिक विकास: बाजार की बदलती भूमिका एवं आयोजना, निजी सरकारी साझेदारी।

(ड.)

कल्याण संकेतक एवं वृद्धि के माप - मानव विकास के सूचक, आधारभूत आवश्यकताओं का उपागम।

(च)

विकास एवं पर्यावरणी धारणीता- पुनर्नवीकरणीय एवं अपुनर्नवीकरणीय संसाधन, पर्यावरणी अपकर्ष, अंतर पीढो इक्विटो विकास।

मुख्य परीक्षा पेपर VII · 250 अंक · 3 घंटे

अर्थशास्त्र — प्रश्न पत्र II

1.

स्वतंत्रतापूर्व युग में भारतीय अर्थव्यवस्था:

भूमि प्रणाली एवं इसके परिवर्तन, कृषि का वाणिज्यीकरण, अपवहन सिद्धांत, अबधंता सिद्धांत एवं समालोचना, निर्माण एवं परिवहन: जूट, कपास, रेलवे मुद्रा एवं साख।

2.

स्वतंत्रता के पश्चात् भारतीय अर्थव्यवस्था:

क.

उदारीकरण के पूर्व का युग:

(i)

वकील, गाडगिल एवं वी. के. आर. वी. आर. के योगदान।

(ii)

कृषि: भूमि सुधार एवं भूमि पट्टा प्रणाली, हरित क्रान्ति एवं कृषि में पूंजी निर्माण।

(iii)

संघटन एवं संवृद्धि में व्यापार प्रवृतियां, सरकारी एवं निजी क्षेत्रकों की भूमिका, लघु एवं कुटीर उद्योग।

(iv)

राष्ट्रीय एवं प्रतिव्यक्ति आय: स्वरूप, प्रवृतियां, सकल एवं क्षेत्रकीय संघटन तथा उनमें परिवर्तन।

(v)

राष्ट्रीय आय एवं वितरण को निर्धारित करने वाले स्थूल कारक, गरीबी के माप, गरीबी एवं असमानता में प्रवृतियां।

ख.

उदारीकरण के पश्चात् का युग

(i)

नया आर्थिक सुधार एवं कृषि: कृषि एवं WTO, खाद्य प्रसंस्करण, उपदान, कृषि कीमतें एवं जन वितरण प्रणाली, कृषि संवृद्धि पर लोक व्यय का समाघात।

(ii)

नई आर्थिक नीति एवं उद्योग: औद्योगिक निजीकरण, विनिवेश की कार्य नीति, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश तथा बहुराष्ट्रीयों की भूमिका।

(iii)

नई आर्थिक नीति एवं व्यापार: बौद्धिक संपदा अधिकार: TEIPS, TRIMS, GATS तथा EXIM नई नीति की विवक्षाएं।

(iv)

नई विनियम दर व्यवस्था आंशिक एवं पूर्ण परिवर्तनीयता।

(v)

नई आर्थिक नीति एवं लोक वित्त: राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम, बारहवां एवं वित्त आयोग एवं राजकोषीय संघवाद का राजकोषीय समेकन।

(vi)

नई आर्थिक नीति एवं मौद्रिक प्रणाली, नई व्यवस्था में RBI की भूमिका

(vii)

आयोजन केन्द्रीय आयोजन से सांकेतिक आयोजन तक, विकेन्द्रीकृत आयोजना और संवृद्धि हेतु बाजार एवं आयोजना के बीच संबंध : 73 वां एवं 74 वां संवि धान संशोधन।

(viii)

नई आर्थिक नीति एवं रोजगार: रोजगार एवं गरीबी, ग्रामीण मजदूरी, रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन योजनाएं, नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना।

पाठ: UPSC, संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी (सिविल सेवा परीक्षा, 2026), पृ. 89–93 ↗। वर्तनी UPSC की अपनी है।

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FAQ

अर्थशास्त्र: आपके प्रश्न, हमारे उत्तर

UPSC अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय में कितने पेपर होते हैं?

दो — मुख्य परीक्षा के पेपर VI और VII (वैकल्पिक पेपर 1 और पेपर 2), 250-250 अंक और तीन-तीन घंटे, कुल 500 अंक।

UPSC अर्थशास्त्र वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में क्या है?

दोनों पेपरों का पूरा पाठ्यक्रम इस पेज पर UPSC के अपने हिंदी शब्दों में है, उसके सीएसई 2026 नोटिस (पृ. 89–93) से।

अर्थशास्त्र का आधिकारिक पाठ्यक्रम कहाँ मिलेगा?

सिविल सेवा परीक्षा 2026 के UPSC नोटिस (परीक्षा नोटिस सं. 05/2026-सीएसपी) के खंड-III, भाग-ख में — हिंदी नोटिस में पृ. 89–93।