प्रारंभिक 2026 · प्रश्न 7
भारत में स्थानीय-मान पद्धति (place-value system) के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- 1.भारत में स्थानीय-मान पद्धति का सर्वप्रथम उत्कीर्ण-अभिलेखीय उपयोग गुजरात की मनकणी पट्टिकाओं (595 – 596 AD) में मिलता है।
- 2.नवीं शताब्दी में, संपूर्ण भारत में उत्कीर्ण लेखों में स्थानीय-मान सामान्य हो जाते हैं।
- 3.दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत के उत्कीर्ण लेखों में स्थानीय-मान सातवीं शताब्दी के प्रारंभ से ही मिलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a)केवल 1 और 2
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 3
- (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें
UPSC का अनंतिम उत्तर: (d)
NCERT में विषय है; उत्तर UPSC की कुंजी से: कक्षा 11 'Knowledge Traditions and Practices of India', अध्याय 6 बताता है कि दशमलव स्थानीय-मान पद्धति का आविष्कार और पहला प्रयोग भारत में हुआ। पर यह नहीं बताता कि अभिलेखों में यह पहली बार कहाँ मिलती है। UPSC का उत्तर (d) है, यानी तीनों कथन सही हैं। भारत में इसका सबसे पुराना अभिलेख गुजरात के मानकणी ताम्रपत्र (595–596 ई.) हैं। नौवीं सदी तक भारतीय अभिलेखों में स्थानीय-मान आम हो गया, और दक्षिण-पूर्व एशिया के संस्कृत अभिलेखों में यह सातवीं सदी से मिलता है। उत्तर (d)।
NCERT में विषय है (उत्तर नहीं): कक्षा 11 'Knowledge Traditions and Practices of India, Part I', अध्याय 6 (Mathematics in India)।
यह प्रश्न हिंदी में: UPSC का आधिकारिक प्रश्न पत्र (2026), प्रश्न 7 ↗