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भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार

कक्षा 11 · राजव्यवस्था

अध्याय 6 · न्यायपालिका

2016–2026 के UPSC प्रारंभिक परीक्षा के असली प्रश्न, जो इस किताब से जुड़े हैं। पहले हर प्रश्न ख़ुद हल करें, फिर उत्तर खोलें। 2026 के उत्तर UPSC की अनंतिम उत्तर कुंजी पर आधारित हैं।

प्रश्नों का हिंदी पाठ UPSC के आधिकारिक प्रश्न पत्र से लिया गया है, जैसा छपा है।

प्रारंभिक 2017 · प्रश्न 92

भारत में, न्यायिक पुनरीक्षण का अर्थ है

  1. (a)विधियों और कार्यपालिक आदेशों की सांविधानिकता के विषय में प्राख्यापन करने का न्यायपालिका का अधिकार ।
  2. (b)विधानमण्डलों द्वारा निर्मित विधियों के प्रज्ञान को प्रश्नगत करने का न्यायपालिका का अधिकार ।
  3. (c)न्यायपालिका का, सभी विधायी अधिनियमनों के, राष्ट्रपति द्वारा उन पर सहमति प्रदान किए जाने के पूर्व, पुनरीक्षण का अधिकार ।
  4. (d)न्यायपालिका का, समान य़ा भिन्न वादों में पूर्व में दिए गए स्वयं के निर्णयों के पुनरीक्षण का अधिकार ।
उत्तर देखें

UPSC का उत्तर: (a)

NCERT में उत्तर: कक्षा 11 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार', अध्याय 6 (न्यायपालिका)।

भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार (अध्याय 6): न्यायिक पुनरावलोकन सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों की वह शक्ति है जिससे वे किसी भी क़ानून की संवैधानिकता जाँचते हैं। इसलिए (a)।

यह प्रश्न हिंदी में: UPSC का आधिकारिक प्रश्न पत्र (2017), प्रश्न 92 ↗

प्रारंभिक 2019 · प्रश्न 81

भारत के संविधान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. 1.किसी भी केंद्रीय विधि को सांविधानिक रूप से अवैध घोषित करने की किसी भी उच्च न्यायालय की अधिकारिता नहीं होगी।
  2. 2.भारत के संविधान के किसी भी संशोधन पर भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 2
  3. (c)1 और 2 दोनों
  4. (d)न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

UPSC का उत्तर: (d)

NCERT में उत्तर: कक्षा 11 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार', अध्याय 6 (न्यायपालिका); कक्षा 11 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार', अध्याय 9 (संविधान – एक जीवंत दस्तावेज़)।

भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार: सर्वोच्च न्यायालय की तरह उच्च न्यायालय भी किसी भी क़ानून की संवैधानिकता जाँच सकते हैं (अध्याय 6)। कोई संशोधन मूल ढाँचे का उल्लंघन करता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय भी न्यायपालिका ही करती है (अध्याय 9)। दोनों कथन ग़लत हैं। इसलिए (d)।

यह प्रश्न हिंदी में: UPSC का आधिकारिक प्रश्न पत्र (2019), प्रश्न 81 ↗

प्रारंभिक 2020 · प्रश्न 13

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

  1. 1.भारत का संविधान अपने ‘मूल ढाँचे’ को संघवाद, पंथनिरपेक्षता, मूल अधिकारों तथा लोकतंत्र के रूप में परिभाषित करता है ।
  2. 2.भारत का संविधान, नागरिकों की स्वतंत्रता तथा उन आदर्शों जिन पर संविधान आधारित है, की सुरक्षा हेतु ‘न्यायिक पुनरवलोकन’ की व्यवस्था करता है ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?

  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 2
  3. (c)1 और 2 दोनों
  4. (d)न तो 1, न ही 2
उत्तर देखें

UPSC का उत्तर: (d)

NCERT में उत्तर: कक्षा 11 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार', अध्याय 9 (संविधान – एक जीवंत दस्तावेज़); कक्षा 11 'भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार', अध्याय 6 (न्यायपालिका)।

भारत का संविधान: सिद्धांत और व्यवहार: मूल ढाँचे का सिद्धांत संविधान में कहीं नहीं लिखा है (अध्याय 9), और 'न्यायिक पुनरावलोकन' शब्द भी नहीं है (अध्याय 6)। दोनों कथन ग़लत हैं। इसलिए (d)।

यह प्रश्न हिंदी में: UPSC का आधिकारिक प्रश्न पत्र (2020), प्रश्न 13 ↗

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पिछले वर्षों के प्रश्न upsc.gov.in पर प्रकाशित UPSC के प्रश्न पत्रों और उत्तर कुंजियों (अंतिम कुंजियाँ; 2026 के लिए अनंतिम कुंजी) से लिए गए हैं।

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