प्रारंभिक 2016 · प्रश्न 50
भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- 1.बोधिसत्त्व, बौद्धमत के हीनयान सम्प्रदाय की केंद्रीय संकल्पना है।
- 2.बोधिसत्त्व अपने प्रबोध के मार्ग पर बढ़ता हुआ करुणामय है।
- 3.बोधिसत्त्व समस्त सचेतन प्राणियों को उनके प्रबोध के मार्ग पर चलने में सहायता करने के लिए स्वयं की निर्वाण प्राप्ति विलम्बित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2 और 3
- (c)केवल 2
- (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें
UPSC का उत्तर: (b)
NCERT में उत्तर: कक्षा 12 'भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग 1', विषय 4 (विचारक, विश्वास और इमारतें: सांस्कृतिक विकास)।
भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग 1 (विषय 4): बोधिसत्त करुणामय थे, जो स्वयं निब्बान पाने के बजाय दूसरों की मदद के लिए रुके रहते थे। सोचने के इस नए ढंग को महायान कहा गया, हीनयान नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं, 1 ग़लत है। इसलिए (b)।
यह प्रश्न हिंदी में: UPSC का आधिकारिक प्रश्न पत्र (2016), प्रश्न 50 ↗